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| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
1885 मध्ये हिंदुस्थानात राष्ट्रीय सभेची स्थापना झाली आणि सनदशीर मार्गाने पुण्याऐवजी मुंबई येथे राष्ट्रीय सभेचे पहिले अधिवेशन भरुन राष्ट्रीय चळवळीला प्रारंभ झाला. 1905 पर्यंत राष्ट्रीय सभेने हा मार्ग स्वीकारला. त्याला मवाळांची चळवळ म्हणतात. परंतु 1905 नंतर लाल, बाल आणि पाल यांना हा मार्ग योग्य वाटला नाही. त्यांतून जहालांची चळवळ सुरु झाली. विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी सशस्त्र क्रांतीकारकांचा उदय झाला. श्यामजी वर्मा, स्वातंत्र्यवीर वि. दा. सावरकर आणि गदर क्रांतीकारकांनी परदेशात राहून भारताच्या स्वातंत्र्यासाठी प्रयत्न केले. लोकमान्य टिळकांच्या मृत्युनंतर गांधी युग अवतरले. याकाळात असहकार आंदोलन, सविनय कायदेभंग चळवळ, वैयक्तिक सत्याग्रह आणि चले जाव आंदोलनासारख्या चळवळी निर्माण झाल्या. नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांनी आझाद हिंद सेनेची उभारणी करुन ब्रिटीश सत्तेला मोठे आव्हान दिले. यातून शेवटी ब्रिटीशांना फाळणी करुन हिंदुस्थान सोडावा लागला. हा सारा रोमहर्षक इतिहास या ग्रंथात ग्रथीत केला आहे. भारतीय स्वातंत्र्य चळवळीचा हा इतिहास सर्वांना नक्कीच आवडेल.
भारतातील राष्ट्रवादाचा उदय आणि विकास : अ) राष्ट्रवादाच्या उदयाची कारणे, ब) राष्ट्रीय सभेची स्थापना, क) मवाळ काँग्रेस, ड) सशस्त्र क्रांतीकारी चळवळी.
जन आंदोलन : अ) असहकार आंदोलन, ब) सविनय कायदेभंगाची चळवळ (1930-31), क) ‘चले जाव’ आंदोलन (1942).
स्वातंत्र्याकडे वाटचाल आणि फाळणी : अ) जमातवादाचा उदय आणि विकास, ब) नेताजी सुभाषचंद्र बोस आणि आझाद हिंद सेना, क) सत्तांतर – क्रिप्स मिशन, त्रिमंत्री योजना, माऊंट बॅटन योजना, हिंदुस्थानच्या स्वातंत्र्याचा कायदा, फाळणी.
वंचितांच्या चळवळी : अ) शेतकऱ्यांच्या चळवळी, ब) कामगार चळवळ, क) दलित चळवळ, ड) स्त्रीविषयक चळवळी, इ) आदिवासींचे उठाव.