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भारतीय समाज और साहित्य में स्वतंत्रता के बाद आमूलाग्र परिवर्तन हुआ| परिवर्तन की तेज आँधी ने भारतीय समाज को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है| साहित्य में नई विधाओं का जन्म हुआ वैसे-वैसे कई साहित्यकारों ने अपनी तुलिकाओं से इनमें तरह-तरह के रंग भरे| उसी तरह हिंदी साहित्य की महत्त्वपूर्ण विधा यात्रा-साहित्य भी है| कालानुरूप आधुनिक युग के सभी साहित्यकारों ने इस विधा को स्वीकार करते हुए उसके महत्त्व को भी प्रतिपादित किया है|
मानव जीवन स्वयं एक यात्रा है| देश-विदेश के कई घुमक्कड प्राचीन काल से यात्राएँ करते आ रहे हैं| यात्रा का मानव विकास एवं संस्कृतियों के आदान-प्रदान में बहुत महत्त्व है| ‘मेरी जापान यात्रा’ यह यात्रा-साहित्य राष्ट्रसंत श्री तुकडोजी महाराज इनके भारत के प्रतिनिधि के रूप में विश्वधर्म-विश्वशांति परिषद, जापान में सम्मिलित होने का यात्रा-वृत्तांत है| जापान देश की प्रगति का सार भी श्री राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने बीच-बीच में प्रस्तुत किया है और भारत देश के प्रगति की कामन की है|
Yatra Sahitya Ka Itihas