{"product_id":"लोकसाहित्यः-समाज-और-संस्कृति","title":"लोकसाहित्यः समाज और संस्कृति","description":"\u003cp\u003eभारतवर्ष की समग्र लोकबोलियों में श्री राम तथा सीता के आदर्शोे का ही वर्णन है । श्रीराम मे आदर्शो को जनमानस में पहुँचाने की कोशिश का जीता-जागता प्रमाण है । आज जरूरत है इन आदर्शो को अपनाने की । इसीलिए लोकसाहित्य पर नये आयाम से प्रकाश डालना बहुत जरूरी है ।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआज दुनिया में एक क्रांति बडी तेजी से फैलती जा रही है । लोक मानने लगे है कि विदेशी भाषा ही सब कुछ है । यह सच है कि ङ्गग्लोबलायजेशनफ के इस दौर में हमने पश्चिमी देशों की नकल करना तो शुरू कर दिया, उनके नियमों को नही अपनाया । पैसा ही सबकुछ समझकर विदेशी भाषा सहित्य के मोहपाश में पडे है और असली देशी भाषाओ लोकसाहित्य की उपेक्षा कर वह पिछड रहा है । विदेशी भाषा तथा दरदर्शन के विभिन्न चॅनेल्स के कारण इन तमाम परिवर्तनों का प्रभाव बच्चों पर बडे पैमाने पर पड रहा है । परिवर्तन के दुष्परिणामों को रोकने के लिए मूलभूत सोच में बदलाव लाना होगा । प्रस्तुत ग्रंथ में आपको भारतीय लोकसाहित्य का समाज तथा संस्कृति का सुदर्शन होगा ।\u003c\/p\u003e","brand":"Prashant Publication","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":48474807992549,"sku":null,"price":275.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0802\/8563\/0693\/files\/Loksahitya_Samaj-Sanskriti-1-1.jpg?v=1772109185","url":"https:\/\/prashantpublications.com\/products\/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%83-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%bf","provider":"My Store","version":"1.0","type":"link"}