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Welcome to Prashant Publications
| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
…तो आवाज
सातत्याने निनादतो आहे
अडीच हजार वर्षांपासून
या पृथ्वीतलावर…
बोलावतोय प्रत्येकाला
प्रकाशमान सूर्याचं आवतन देत!
1. मराठी बौद्ध साहित्यातील पहिले खंडकाव्य:‘बा, तथागता !’ – जयसिंग वाघ
2. ‘बा, तथागता !’ बोधी मानस अभिव्यक्त करणारे प्रज्ञाकाव्य – डॉ. कमलाकर पायस
3. गंभीर आशयाची सुलभ मांडणी : ‘बा, तथागता !’ – डॉ. अक्षय किशोर घोरपडे
4. तथागत गौतम बुद्धांचे जीवन आणि तत्त्वज्ञान याची चिंतनशील अभिव्यक्ती : ‘बा, तथागता !’ – डॉ. योगेश महाले
5 धर्म आणि मानवतेचा चिकित्सक अनुबंध शोधणारे विशालकाव्य ‘बा, तथागता !’ – डॉ. धनराज तोताराम धनगर
6. ‘बा, तथागता !’ : भगवंताचे जीवन काव्य – आचार्य महानागरत्न
7. बुद्ध विचारांचे प्रयोगशील काव्यात्मक अधिष्ठान : ‘बा तथागता..!’ – डॉ. संजीवकुमार सोनवणे
8. मानव कल्याणाच्या सम्यक् मार्गाचा विवेकनिष्ठ प्रवास : ‘बा तथागता !’ – ॲड. विलास मोरे
9. बुद्ध तत्त्वविचारांचे सम्यक् दर्शन : ‘बा, तथागता !’ – डॉ. अतुल मधुकरराव देशमुख
10. ‘बा, तथागता !’ बुद्धविचाराचा काव्यात्म आविष्कार – प्रा. डॉ. शैलेंद्र धर्मदास लेंडे
11. माणुसकीचा विचार पेरणारे महाकाव्य : ‘बा, तथागता!’ – प्रा. डॉ. वासुदेव सोमाजी वले
12. ‘बा तथागता !’ – मानव मुक्तीचे दीर्घकाव्य – संजय चौधरी
13. ‘बा, तथागता !’ बुद्ध विचारांची चिंतनशील मीमांसा – प्रा. डॉ. फुला बागूल
14. ‘बा, तथागता!’ : सम्मासम्बुद्धाच्या सम्यक् तत्त्वनिष्ठ विचारांची काव्यगाथा – डॉ. सत्यजित बळीराम साळवे
15. बुद्धविचारांचे सम्यक् काव्य : ‘बा, तथागता !’ – डॉ. शंकर बोऱ्हाडे
16. समाजाला दिशा देणारा विशाल काव्यग्रंथ : ‘बा, तथागता!’ – प्रा. बाळासाहेब मधुकरराव सूर्यवंशी
17. पुरोगामी व प्रतिगामी विचारांची चिकित्सा : ‘बा, तथागता!’ – डॉ. सतीश मस्के
18. ‘बा, तथागता!’ : वाचक मनाला प्रकाशित करणारे बुद्धदर्शन – अरूण सोनटक्के
19. ‘बा, तथागता!’: बौध्द तत्त्वज्ञानाची मानवतावादी चिकित्सा – डॉ. संतोष खिराडे
20. जगण्याचे सजग भान देणारी कविता : ‘बा, तथागता !’ – प्रा. ज्ञानेश्वर कांबळे
21. उच्चतम जीवन जगण्याचे रसायन म्हणजे ‘बा, तथागता !’ काव्य ! – सोपान भवरे
परिशिष्ट्ये
अ. कवी : मुलाखत
ब. सहलेखक : परिचय
क. संपादक : परिचय