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Welcome to Prashant Publications
| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
विश्व में विश्व-भाषा हिन्दी (मॉरिशस)
विश्वभाषा में देशीवाद का योगदान
भारतीय प्रवासी साहित्य का माहात्म्य
स्वच्छ भारत : सामुदायिक उत्तरदायित्व
अयोध्या मन्दिर वहीं : मस्जिद नई
पुरस्कार वापसी : आत्ममन्थन?
सूचना प्राद्योगिकी युग में हिन्दी भाषा का महत्व
सबकी चाह : नोबल पुरस्कार
समकालीन लोकसाहित्य ग्रंथों में ‘स्त्री’
भूमण्डलीकरण में भाषा साहित्य का योगदान
आदिवासी साहित्य में अनूठी जीवनशैली
आकडों में नारीकर्म विमर्श
श्री मंगल शनि शिंगणापुर : शिरडी
सोशल मीडिया के बढते साम्राज्य और हिन्दी
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्डस्
विश्व पुस्तक मेला : नयी देहली
अहिन्दी भाषी की समीक्षा : हास्यास्पद
पीएच.डी. प्रबंध क्या अबंध?
महाराष्ट्र का संत साहित्य
सच विद्यावाचस्पति का गुनहगार है!
हिन्दी मीडिया का माहात्म्य
हिन्दी व्यंग्य विधा का विकास
सामाजिक कुरीतियाँ : हमारी बेडियाँ
लघुकथा और लघुव्यंग्य का पार्थक्य
वृन्दावनलाल वर्मा की उपन्यास – ‘झाँशी की रानी’
लोग भूल गए हैं के परिप्रेक्ष्य में : रघुवीर सहाय
धुआँ ही….. धुआँ : समीक्षा
वर्तमान भारतीय परिवेश में मध्ययुगीन भक्तिकाव्य की प्रासंगिकता
शरद जोशी एवं पु.ल.देशपांडे के व्यंग्य साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन
स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी व्यंग्य निबंध एवं निबंधकार
वक्रोक्ति और अभिव्यंजना
देवनागरी लिपि एवं वैज्ञानिकता
पर्यटन क्षेत्र में हिन्दी प्रयोग : सीमाएँ और संभावनाएँ
हिन्दी वर्तनी – भूलें – अशुद्धियाँ
भारत के प्रथम अंतरिक्ष वीर – श्री.राकेश शर्मा
व्यंग्य की डगर पर एक डगमगाती पहलकदमी
‘महाभोज’ की समीक्षा
व्यंग्य कर्म की चुनौतियाँ और दायित्व
प्राचार्य डॉ.बापूराव देसाई त्रिभाषा प्रकाशित ग्रंथ संपदा