हिंदी भाषा शिक्षण
B.E.D
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Rs.595.00
- DESCRIPTION
- INDEX
अध्याय 1 : भाषा, उसका रूप तथा महत्त्व………………………………19
1.1 प्रस्तावना
1.2 भाषा की परिभाषा
1.3 भाषा संबंधित दृष्टिकोण
1.4 भाषा की विशेषताएँ
1.5 भाषा का महत्व एवं कार्य
1.6 भाषा के रूप
1.6.1 प्रयोग की दृष्टि से भाषा के रूप
1.6.2 भौगोलिक विभिन्नता एवं बहुभाषिकता की दृष्टि से हिंदी भाषा के रूप
1.7 हिंदी भाषा की स्थिति
1.7.1 स्वतंत्रता से पूर्व हिंदी की स्थिति
1.7.2 स्वतंत्र भारत में हिंदी की स्थिति-हिंदी की संवैधानिक स्थिति
1.8 बहुभाषिक देश में राष्ट्रभाषा की आवश्यकता
अध्याय 2 : अहिंदी प्रदेशों में हिंदी का अध्ययन एवं अध्यापन……………..47
2.1 प्रस्तावना
2.2 द्वितीय या अन्य भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
2.3 अन्य भाषा शिक्षण के सिद्धांत
2.4 अहिंदी प्रदेशों में हिंदी शिक्षण की समस्याएँ
2.5 बहुभाषिकता की समस्या तथा भाषा शिक्षण नीति
2.5.1 द्विभाषा सूत्र
2.5.2 त्रिभाषा सूत्र
2.5.3 महाराष्ट्र के पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा का स्थान
अध्याय 3 : हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य………………………………..60
3.1 प्रस्तावना
3.2 पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
3.3 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 5, 6, 7 एवं 8) पर हिंदी भाषा शिक्षा के सामान्य उद्देश्य
3.4 माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 एवं 10) पर हिंदी भाषा शिक्षा के सामान्य उद्देश्य
3.5 उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 11 एवं 12) पर हिंदी भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
3.6 कक्षा अध्यापन के उद्देश्य एवं उनका स्पष्टीकरण
3.7 हिंदी भाषा शिक्षण के व्यापक उद्देश्य
3.7.1 राष्ट्रीय उद्देश्य
3.7.2 सांस्कृतिक उद्देश्य
3.7.3 साहित्यिक उद्देश्य
3.7.4 भाषिक उद्देश्य
3.7.5 व्यावहारिक उद्देश्य
अध्याय 4 : हिंदी भाषा और समवाय……………………………………83
4.1 प्रस्तावना
4.2 समवाय का अर्थ
4.3 समवाय के प्रकार
4.3.1 क्षैतिज या क्षितिज समवाय
4.3.2 ऊर्ध्वाधर या लंबीय समवाय
4.4 हिंदी भाषा का अन्य विषयों से समवाय
4.5 समवाय कैसा हो
4.6 समवाय के लाभ
4.7 समवाय के दोष
अध्याय 5 : शैक्षिक नियोजन…………………………………………..90
5.1 प्रस्तावना
5.2 वार्षिक योजना
5.3 वार्षिक योजना कैसी हो
हिंदी भाषा शिक्षण | 7
5.4 वार्षिक योजना के तत्व (घटक)
5.5 वार्षिक योजना का महत्व
5.6 इकाई योजना
5.7 इकाई योजना के अंग/भाग
5.8 इकाई योजना के लाभ
5.9 पाठ योजना
5.10 पाठ योजना की विशेषताएँ
5.11 पाठ योजना के सोपान (सीढ़ियाँ)
5.12 पाठ योजना के लाभ
अध्याय 6 : श्रवण कौशल……………………………………………110
6.1 प्रस्तावना
6.2 श्रवण कौशल
6.3 श्रवण कौशल के अंग
6.3.1 यांत्रिक अंग
6.3.2 बौद्धिक अंग
6.4 श्रवण के उद्देश्य
6.5 श्रवण दोष
6.6 श्रवण दोष दूर करने के उपाय
6.7 श्रवण कौशल का विकास
6.7.1 कक्षा शिक्षण के दौरान
6.7.2 सह शैक्षिक क्रियायों के दौरान
6.7.3 कक्षेत्तर/कक्षा बाह्य कार्यकलापों के दौरान
अध्याय 7 : भाषण कौशल…………………………………………..125
7.1 प्रस्तावना
7.2 भाषण कौशल के अंग (विविध पक्ष)
7.3 भाषण/मौखिक अभिव्यक्ति के रूप
7.4 भाषण के उद्देश्य
7.5 भाषण दोष
7.6 भाषण दोष दूर करने के उपाय
7.7 भाषण कौशल का विकास
अध्याय 8 : पठन कौशल…………………………………………….138
8.1 प्रस्तावना
8.2 पठन के प्रकार
8.2.1. सस्वर पठन
8.2.1.1 सस्वर पठन की विशेषताएँ
8.2.1.2 सस्वर पठन में ध्यान रखने की बातें
8.2.1.3 सस्वर पठन के लाभ
8.2.1.4 सस्वर पठन का क्रम
8.2.1.5 सस्वर पठन के प्रकार
8.2.1.5.1 आदर्श पठन
8.2.1.5.2 आदर्श पठन के उद्देश्य
8.2.1.6 अनुकरण पठन
8.2.1.6.1 अनुकरण पठन के उद्देश्य
8.2.2 मौन पठन
8.2.2.1 मौन पठन की विशेषताएं
8.2.2.2 मौन पठन में ध्यान रखने की बातें
8.2.2.3 मौन पठन के लाभ
8.2.2.4 मौन पठन के प्रकार
8.2.2.4.1 गहन पठन
8.2.2.4.1.1 गहन पठन के उद्देश्य
8.2.2.4.2 दुत पठन
8.2.2.4.2.1 द्रुत पठन के उद्देश्य
8.3 पठन कौशल के अंग
8.4 पठन के उद्देश्य
8.5 पठन दोष
8.5.1 पठन के यांत्रिक पक्ष से संबंधित दोष
8.5.2 पठन के मानसिक पक्ष से संबंधित दोष
8.6 पठन दोष दूर करने के उपाय
8.7 पठन शिक्षण की विधियाँ
अध्याय 9 : लेखन कौशल…………………………………………..163
9.1 प्रस्तावना
9.2 लेखन का महत्व
9.3 लेखन कौशल के अंग/पक्ष
9.3.1 यांत्रिक अंग
9.3.2 बौद्धिक अंग
9.4 लेखन के प्रकार
9.5 लेखन के उद्देश्य
9.6 लिखित रचना के प्रकार एवं उनका शिक्षण
9.7 लेखन दोष
9.8 लेखन दोष दूर करने के उपाय
9.9 लेखन कौशल विकास के उपाय
अध्याय 10 : शिक्षा के सूत्र, शिक्षण प्रणालियाँ एवं युक्तियाँ…………….185
10.1 प्रस्तावना
10.220 शिक्षा के सूत्र
10.3 शिक्षण सूत्र की परिभाषा
10.4 शिक्षा के विभिन्न सूत्र
10.5 हिंदी भाषा शिक्षण की प्रणालियाँ
10.5.1 स्वाभाविक प्रणाली
10.5.1.1 स्वाभाविक प्रणाली का स्वरूप
10.5.1.2 स्वाभाविक प्रणाली के गुण या महत्व
10.5.1.3 स्वाभाविक प्रणाली के दोष या सीमाएँ
10.5.2 व्याकरण अनुवाद प्रणाली
10.5.2.1 व्याकरण अनुवाद प्रणाली का स्वरूप
10.5.2.2 व्याकरण अनुवाद प्रणाली के गुण
10.5.2.3 व्याकरण अनुवाद प्रणाली के दोष
10.5.3 प्रत्यक्ष प्रणाली या संभाषण प्रणाली
10.5.3.1 प्रत्यक्ष प्रणाली या संभाषण प्रणाली का स्वरूप
10.5.3.2 प्रत्यक्ष प्रणाली की प्रक्रिया
10.5.3.3 प्रत्यक्ष प्रणाली के गुण
10.5.3.4 प्रत्यक्ष प्रणाली के दोष
10.5.4 वेस्ट प्रणाली
10.5.4.1 वेस्ट प्रणाली का स्वरूप
10.5.4.2 वेस्ट प्रणाली के प्रमुख घटक
10.5.4.3 वेस्ट प्रणाली के गुण
10.5.4.4 वेस्ट प्रणाली के दोष
10.5.5 गठन या रचना प्रणाली
10.5.5.1 गठन प्रणाली का स्वरूप
10.5.5.2 गठन या रचना प्रणाली के गुण
10.5.5.3. गठन या रचना प्रणाली के दोष
10.5.6. संप्रेषण पद्धति
10.5.6.1 संचारी भाषा शिक्षण या संप्रेषण पद्धति के सिद्धांत
10.5.6.2 संप्रेषण पद्धति द्वारा शिक्षण प्रक्रिया (सोपान)
10.5.6.3 संप्रेषण पद्धति में शिक्षक की भूमिका
10.5.6.4 संप्रेषण पद्धति में छात्रों की भूमिका
10.5.6.5 संप्रेषण पद्धति के गुण
10.5.6.6 संप्रेषण पद्धति के दोष
10.5.7 व्याख्यान विधि
10.5.7.1 व्याख्यान विधि के सोपान
10.5.7.2 व्याख्यान विधि के लाभ
10.5.7.3 व्याख्यान विधि की सीमाएँ
10.5.7.4 व्याख्यान विधि के प्रभावी प्रयोग हेतु सुझाव
10.6 सहयोगी शिक्षण विधियाँ
10.6.1 युग्म विचार
10.6.1.1 युग्म विचार विधि के सोपान
10.6.1.2 युग्म विचार विधि में शिक्षक की भूमिका
10.6.1.3 युग्म विचार विधि के लाभ
10.6.1.4 युग्म विचार विधि की सीमाएँ
10.6.2 जिगसॉ विधि
10.6.2.1 जिगसॉ विधि के सोपान
10.6.2.2 जिगसॉ विधि के उपयोग में सावधानी
10.6.2.3 जिगसॉ विधि के लाभ
10.6.2.4 जिगसॉ विधि की सीमाएँ
10.6.3 टोकरी तकनीक
10.6.3.1 कक्षा में टोकरी तकनीक का प्रयोग
10.6.3.2 टोकरी तकनीक के लाभ
10.6.3.3 टोकरी तकनीक की सीमाएँ
10.6.4 चर्चा विधि
10.6.4.1 चर्चा विधि के सोपान
10.6.4.2 चर्चा विधि के लाभ
10.6.4.3 चर्चा विधि की सीमाएँ
10.6.5 नाटयीकरण विधि
10.6.5.1 नाटयीकरण विधि के सोपान
10.6.5.2 नाटयीकरण विधि के लाभ
10.6.5.3 नाटयीकरण विधि की सीमाएँ
10.7 शिक्षक प्रविधियाँ या शिक्षण युक्तियाँ
10.7.1 प्रश्न प्रविधि
10.7.1.1 प्रश्न प्रविधि का महत्व
10.7.1.2 प्रश्न कैसा होना चाहिए?
10.7.2 विवरण प्रविधि
10.7.2.1 विवरण प्रविधि की उपयोगिता या महत्व
10.7.2.2 विवरण देने में सावधानियाँ/
विवरण कैसा होना चाहिए?
10.7.3 वर्णन विधि
10.7.3.1 वर्णन करने की सावधानियाँ/ वर्णन कैसा होना चाहिए?
10.7.4 स्पष्टीकरण विधि
10.7.4.1 स्पष्टीकरण विधि के लाभ
10.7.4.2 स्पष्टीकरण करने में सावधानियाँ
10.7.5 कहानी कथन प्रविधि या कथा-कथन प्रविधि
10.7.5.1 कहानी कथन प्रविधि के लाभ
10.7.5.2 कहानी कहने की सावधानियाँ
10.7.6 उदाहरण प्रविधि
10.7.6.1 उदाहरण प्रविधि का महत्व
10.7.6.2 उदाहरण प्रविधि का प्रयोग कैसे करें?
10.7.7 गृहकार्य प्रविधि
10.7.7.1 गृहकार्य का स्वरूप
10.7.7.2 गृहकार्य की उपयोगिता या महत्व
10.7.7.3 गृहकार्य का मूल्यांकन तथा संशोधन
10.7.7.4 गृहकार्य कैसा होना चाहिए?
10.8 शिक्षा का रचनावादी दृष्टिकोण
10.8.1 रचनावादी दृष्टिकोण की विशेषताएँ
10.8.2 रचनावादी शिक्षा का स्वरूप
10.8.3 रचनावादी पाठ्यक्रम
10.8.4 रचनावादी शिक्षण पद्धति
10.8.5 शिक्षक की भूमिका
10.8.6 छात्रों की भूमिका
10.8.7 कक्षा व्यवस्था और प्रबंध
10.8.8 मूल्यांकन
अध्याय 11 : शैक्षणिक अनुभव एवं सहायक सामग्री……………………264
11.1 प्रस्तावना
11.2 शैक्षणिक अनुभव
11.3 शैक्षणिक अनुभव के प्रकार
11.4 शैक्षणिक अनुभव कैसा होना चाहिए/विशेषताएँ
11.5 हिंदी शिक्षण में सहायक सामग्री
11.6 सहायक सामग्री की उपयोगिता एवं महत्व
11.7 सहायक सामग्री का चयन
11.8 सहायक सामग्री का प्रभावी प्रयोग में सावधानी
11.9 सहायक सामग्री का वर्गीकरण
11.9.1 दृश्य सामग्री
11.9.2 श्रव्य सामग्री
11.9.3 श्रव्य दृश्य सामग्री
11.10 भाषा शिक्षा की मुद्रित सामग्री
11.11 आधुनिक शिक्षण सामग्री
11.11.1 भाषा प्रयोगशाला
11.11.1.1 भाषा प्रयोगशाला के प्रकार
11.11.1.2 भाषा प्रयोगशाला पाठ का नमूना
11.11.1.3 भाषा प्रयोगशाला का महत्व
11.11.1.4 भाषा प्रयोगशाला की सीमाएँ/दोष
11.11.2 संगणक तथा इंटरनेट
11.11.2.1 भाषा शिक्षण में संगणक का महत्व
11.11.2.2 संगणक की सीमाएँ
अध्याय 12 : गद्य शिक्षण…………………………………………….305
12.1 प्रस्तावना
12.2 गद्य की परिभाषा
12.3 गद्य शिक्षण के उद्देश्य
12.4 गद्य शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
12.5 गद्य शिक्षण का महत्व
12.6 गद्य शिक्षण की विधियाँ/प्रणालियाँ
अध्याय 13 : कविता शिक्षण…………………………………………313
13.1 प्रस्तावना
13.2 कविता/पद्य शिक्षण के उद्देश्य
13.3 कविता के सौंदर्य तत्व
13.4 कविता शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
13.5 कविता शिक्षण की प्रणालियाँ
13.6 कविता में रुचि उत्पन्न करने के उपाय
अध्याय 14 : व्याकरण शिक्षण……………………………………….327
14.1 प्रस्तावना
14.2 व्याकरण की परिभाषा
14.3 व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य
14.4 व्याकरण शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
14.5 व्याकरण अध्यापन की प्रणालियाँ
14.6 व्याकरण शिक्षण का महत्व
14.7 व्याकरण शिक्षण को रुचिकर बनाने के उपाय
अध्याय 15 : रचना शिक्षण…………………………………………..340
15.1 प्रस्तावना
15.2 रचना के प्रकार
15.2.1 मौखिक रचना
15.2.1.1 मौखिक रचना शिक्षण के उद्देश्य
15.2.1.2 मौखिक रचना के प्रकार
15.2.1.3 मौखिक रचना शिक्षण का महत्व
15.2.2 लिखित रचना
15.2.2.1 लिखित रचना शिक्षण के उद्देश्य
15.2.2.2 लिखित रचना के प्रकार
15.2.2.3 लिखित रचना शिक्षण की प्रणालियाँ
15.3 रचना संबंधी सामान्य अशुद्धियाँ
15.4 रचना संबंधी अशुद्धियों के कारण
15.5 लिखित रचना का मूल्यांकन तथा संशोधन
15.5.1 लिखित रचना के मूल्यांकन में ध्यान देने योग्य बाते
15.5.2 लिखित रचना के संशोधन में ध्यान देने योग्य बाते
अध्याय 16 : हिंदी भाषा शिक्षण एवं मूल्यांकन…………………………368
16.1 प्रस्तावना
16.2 मूल्यांकन के उद्देश्य
16.3 मूल्यांकन की विशेषताएँ
16.4 मूल्यांकन की आवश्यकता एवं महत्व
16.5 मूल्यांकन के प्रकार
16.5.1 संरचनात्मक तथा योगात्मक मूल्यांकन में अंतर
16.6 सतत और व्यापक मूल्यांकन
16.7 सतत और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य
16.8 सतत और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएँ
16.9 सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लाभ
16.10 मूल्यांकन की प्रमुख विधियाँ व प्रकार
16.11 लिखित परीक्षा
16.11.1 निबंधात्मक परीक्षा
16.11.1.1 निबंधात्मक परीक्षा के गुण
16.11.1.2 निबंधात्मक परीक्षा के दोष
16.11.2 लघुत्तरी परीक्षा
16.11.2.1 लघुत्तरी परीक्षा के गुण
16.11.2.2 लघुत्तरी परीक्षा के दोष
16.11.3 वस्तुनिष्ठ परीक्षा
16.11.3.1 वस्तुनिष्ठ परीक्षा के प्रकार
16.11.3.2 वस्तुनिष्ठ परीक्षा के गुण
16.11.3.3 वस्तुनिष्ठ परीक्षा के दोष
16.12 मौखिक परीक्षा
16.12.1 मौखिक परीक्षा के गुण
16.12.2 मौखिक परीक्षा के दोष
16.13 प्रायोगिक परीक्षा
16.14 हिंदी का प्रश्न पत्र (इकाई जाँच परीक्षा) निर्माण
16.15 खुली पुस्तक परीक्षा
16.16 खुली पुस्तक परीक्षा के प्रकार
16.17 खुली पुस्तक परीक्षा के गुण
16.18 खुली पुस्तक परीक्षा के दोष
अध्याय 17 : निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण…………….408
17.1 प्रस्तावना
17.2 निदानात्मक परीक्षण का अर्थ एवं परिभाषा
17.3 निदानात्मक परीक्षण के उद्देश्य
17.4 शैक्षणिक निदान के क्षेत्र
17.5 शैक्षणिक निदान की विधियाँ
17.6 निदानात्मक परीक्षण का महत्व
17.7 उपचारात्मक शिक्षण
17.8 उपचारात्मक शिक्षण के उद्देश्य
17.9 उपचारात्मक शिक्षण की विधियाँ
17.10 उपचारात्मक शिक्षण का महत्व
17.11 शैक्षिक निदान एवं उपचारात्मक शिक्षण के सोपान
अध्याय 18 : विषय संरचना………………………………………….420
18.1 प्रस्तावना
18.2 विषय संरचना-अर्थ एवं परिभाषा
18.3 संरचना की विशेषताएँ
18.4 विषय संरचना के प्रकार
18.5 विषय संरचना के लाभ
18.6 हिंदी भाषा की संरचना
अध्याय 19 : आशययुक्त अध्यापन कार्यप्रणाली (पद्धति)………………450
19.1 प्रस्तावना
19.2 आशययुक्त अध्यापन पद्धति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
19.3 आशययुक्त अध्यापन पद्धति की संकल्पना और स्वरूप
19.4 आशययुक्त अध्यापन पद्धति की मान्यताएँ
19.5 आशययुक्त अध्यापन पद्धति के उद्देश्य
19.6 आशययुक्त अध्यापन पद्धति की रचना/सोपान
19.7 आशययुक्त अध्यापन पद्धति का महत्व
19.8 आशय या पाठ्यवस्तु का विश्लेषण
19.9 आशय विश्लेषण के अंग या घटक
19.10 आशय विश्लेषण का महत्व
अध्याय 20 : पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम……………………………….467
20.1 प्रस्तावना
20.2 पाठ्यचर्या-अर्थ एवं परिभाषा
20.3 पाठ्यचर्या की उपयोगिता और महत्व
20.4 पाठ्यचर्या निर्माण के तत्व
20.5 पाठ्यचर्या के केंद्रिक या मूलभूत घटक
20.6 पाठ्यक्रम : अर्थ एवं स्वरूप
20.7 पाठ्यक्रम की आवश्यकता एवं महत्व
20.8 पाठ्यक्रम निर्माण के मूलभूत सिद्धांत या तत्व
20.9 पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम में अंतर
20.10 पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक में सहसंबंध
अध्याय 21 : पाठ्य-पुस्तक…………………………………………482
21.1 प्रस्तावना
21.2 पाठ्य-पुस्तक का अर्थ एवं परिभाषा
21.3 हिंदी पाठ्य-पुस्तकों के प्रकार
21.4 पाठ्य-पुस्तक की आवश्यकता एवं महत्व
21.5 हिंदी पाठ्य-पुस्तक की विशेषताएँ/गुण
21.5.1 आंतरिक विशेषताएँ
21.5.2 बाह्य विशेषताएँ
अध्याय 22 : हिंदी अध्यापक…………………………………………497
22.1 प्रस्तावना
22.2 हिंदी अध्यापक की योग्यता
22.3 हिंदी अध्यापक के गुण
22.3.1 हिंदी अध्यापक के सामान्य गुण
22.3.2 हिंदी अध्यापक के विशिष्ट गुण
22.4 हिंदी अध्यापक का व्यवसायिक विकास
22.5 हिंदी शिक्षक संगठन
22.6 शिक्षक संगठन के उद्देश्य
22.7 शिक्षक संगठन के प्रकार
22.8 शिक्षक संगठन का योगदान
संदर्भ सूची………………………………………………………….513
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