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| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में चिंतन के विविध आयाम – डॉ. मधु खराटे
‘एक कंठ विषपायी’ की प्रतीकात्मकता – डॉ. गिरीश महाजन
दुष्यन्त की कविता-संवेदना की साक्ष्य – डॉ. श्रीमती कामिनी बी. तिवारी
आधुनिक चेतना का अवलंब लेकर नए आयामों को उपस्थित करता : ‘एक कंठ विषपायी’– डॉ. सुरेश तायडे
दुुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में अभिव्यक्त आशावादी चिंतन – डॉ. सुनील कुलकर्णी, डॉ. प्रिती एस. सोनी
यथार्थवादी उपन्यासकार दुष्यंतकुमार – डॉ. जे. व्ही. पाटिल
समकालीन कविता की मुख्यधारा – ग़ज़ल (दुष्यंत कुमार के विशेष संदर्भ में) – डॉ. महेंन्द रघुवंशी
इमानदार अध्यापक की पीड़ा को व्यक्त करनेवाला उपन्यास-‘छोटे-छोटे सवाल’– डॉ. संजयकुमार शर्मा
हिंदी ग़ज़ल के हस्ताक्षर दुष्यंत कुमार: चिंतन के विविध आयाम – डॉ. संजय विक्रम ढोडरे
दुष्यंत कुमार का काव्य संग्रह ‘जलते हुए वन का वसन्त’ में व्यक्त विशेषताएँ – डॉ. आर. के. जाधव
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में वेदनानुभूति – डॉ. अशोक शामराव मराठेे
उपन्यासकार दुष्यंत कुमार – डॉ. सुनीता नारायणराव कावळे
दुष्यंत कुमार के काव्य में सामाजिक चिंतन : एक अनुशीलन – डॉ. शालिनी ब. वाटाणे
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में जीवन के विविध आयाम – डॉ. प्रमोद गोकुळ पाटिल
दुष्यंत कुमार का ग़ज़ल-संग्रह ‘साये में धूप’ में प्रतीक विधान – डॉ. अभयकुमार आर. खैरनार
दुष्यंतकुमार की गज़लों में सामाजिकता – डॉ. गौतम भाईदास कुंवर
दुष्यन्त का उपन्यास ‘छोटे-छोटे सवाल’ ’घाव करे गंभीर’ – डॉ. रेखा पी. गाजरे
दुष्यंत कुमार के ‘साये में धूप’ में व्यक्त सामाजिक चिंतन – डॉ. मृदुला वर्मा
दुष्यंत कुमार का काव्यनाटक-एक कंठ विषपायी – डॉ. स्वाती रमेश नारखेडे
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में आम आदमी की अभिव्यक्ति… – प्रा. अजित चव्हाण
कालजयी रचनाकार दुष्यंत कुमार – डॉ. मनोहर हिलाल पाटिल
नये सत्य का सृजन-पर्व: एक कंठ विषपायी – प्रा. ईश्वर पी. ठाकुर
परंपरा और नए मूल्योेंं के बीच का संघर्ष : एक कंठ विषपायी – डॉ. अमृत खाडपे
दुष्यंत कुमार द्वारा लिखित कविता संग्रह ‘जलते हुए वन का वंसत’ – प्रा. अनील बी. सूर्यवंशी
दुष्यन्त की ग़ज़लों में चित्रित समसामयिक बोध – प्रा. विजय एकनाथ सोनजे
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में वास्तविकता – डॉ. सविता चौधरी
साहित्यकार दुष्यंंत कुमार जनक्रान्ति के महाकवि-दुष्यंत कुमार – लक्ष्मीकांत मिश्र
दुष्यंत कुमार – सामाजिक भावबोध के कवि (साये में धूप के संदर्भ में) – डॉ. सुनील एम. पाटिल
हिन्दी गज़ल की अलग पहचान- ‘साये मेें धूप’ – प्रा. शेख जाकीर एस
दुष्यन्त के ग़ज़लों में व्यक्त आम आदमी – डॉ. राजेश भामरे
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में संवेदना शिल्प – डॉ. आशा दत्तात्रय काबंळे
हिंदी ग़ज़ल के प्रणेता – दुष्यंत कुमार – डॉ. अशफ़ाक़ इब्राहिम सिकलगर
समाज को दिशा प्रदान करनेवाला ग़ज़लकार : दुष्यंतकुमार – डॉ. दिपक विश्वासराव पाटील
दुष्यन्त कुमार की ग़ज़ल में सामाजिक बोध (साये में धूप के विशेष परिप्रेक्ष्य में) – डॉ. वनिता त्र्यंबक पवार
दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में अभिव्यक्त सामाजिक समस्याएँ (‘साये में धूप’ के विशेष संदर्भ में) – डॉ. अनिता नेरे (भामरे)