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नाटक विधा – धरती आबा
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मैंने अबतक हिन्दी व्यंग, उपन्यास, कविता, निबंध तथा आलोचना विधाओं पर काफी लिखा है| उस तुलना में नाटक विधा पर कम लिखा है| अर्थात इसके लिए दूरदर्शन तथा फिल्मों के कारण रंगमंच पर नाटकक्रम दिखाई देते हैं| स्वातंत्र्यपूर्व काल की तुलना में इक्कीसवी सदी में नाटक नहीं के बराबर प्रदर्शित हो रहे है| वैसे समय के साथ हमें चलना ही होगा|

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