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Welcome to Prashant Publications
| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
प्रयोजनमूलक हिंदी : अवधारणा और महत्त्व – डॉ. पोपट भावराव बिरारी
प्रयोजनमूलक हिंदी : स्वरुप एवं विशेषताएँ – डॉ. महावीर रामजी हाके
प्रयोजनमूलक हिंदी की आवश्यकता – बसोरी लाल इनवाती
प्रयोजनमूलक हिंदी का संवैधानिक उपबंध – डॉ सुरेश कुमार
प्रयोजनमूलक हिंदी की व्यावहारिक उपादेयता – डॉ. लक्ष्मण तु. काळे
प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध क्षेत्र – डॉ. वि. सरोजिनी
प्रयोजनमूलक हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ – प्रा. नटवर संपत तडवी
राजभाषा हिंदी का प्रयोजनपरक अध्ययन – डॉ. लवलीन कौर
वैज्ञानिक-तकनीकी क्षेत्र में हिंदी – श्रीमती मंगला जटगोंडा
बैंकिंग क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग और समस्याएँ – मधु मेहता साथी
पारिभाषिक शब्दावली : स्वरुप तथा निर्माण प्रक्रिया – श्रीमती श्रुती मण्किकर
कार्यालयीन हिंदी के प्रमुख कार्य – रोहिणी रामचंद्र सालवे
संक्षेपण लेखन – लूनेश कुमार वर्मा
जनसंचार माध्यम : स्वरूप एवं वर्गीकरण – डॉ श्रीकला. यू
सिनेमा की पटकथा का स्वरूप और लेखन प्रक्रिया – डॉ. रघुनाथ नामदेव वाकळे
डाक्यूमेंट्री लेखन – डॉ. उज्वला अशोक राणे
रिपोर्ताज लेखन – डॉ. ललित चंद्र जोशी
पत्रकारिता का स्वरुप एवं महत्त्व – डॉ. रेवा प्रसाद
कार्यालयीन हिंदी और अनुवाद – डॉ. सरलता राम प्रकाश वर्मा
हिंदी भाषा : विभिन्न रोजगारों की उपलब्धि – डॉ. शिंदे मालती धोंडोपन्त
अनुवाद : स्वरुप और क्षेत्र – डॉ. यशवन्ती देवी
अनुवाद के प्रकार – रजनीश कुमार
अनुवाद : प्रक्रिया और महत्त्व – डॉ. झुनुबाला खुण्टिआ
अनुवाद पुनरीक्षण और मूल्यांकन – डॉ. डॉली सिंह नागर
सृजन का सृजन है साहित्यानुवाद – डॉ. अंगदकुमार सिंह
विश्व भाषाओं से अनूदित हिंदी साहित्य : दशा एवं दिशा – प्रा. डॉ. वीरश्री वशिष्ठजी आर्य
हिंदी अनुवाद और रोजगार की संभावनाएँ – डॉ. आलोक कुमार सिंह
हिंदी कंप्यूटिंग : विविध आयाम – किरण अय्यर वी.