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प्रस्तुत संपादित पुस्तक “स्मरण-रेखा” का निर्माण विश्वविद्यालय स्तरीय हिंदी साहित्य के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों, अध्यापकों, शोधार्थियों एवं साहित्य-प्रेमियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है|...

  • Name : स्मरण - रेखा (हिंदी के श्रेष्ठ संस्मरण और रेखाचित्र)
  • Vendor : Prashant Publication
  • Type : T.Y.B.A. | Sem. 5 |
  • Manufacturing : July 2026
  • Total Pages : 242 Pages
  • Barcode : 9789377760465

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स्मरण - रेखा (हिंदी के श्रेष्ठ संस्मरण और रेखाचित्र)
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प्रस्तुत संपादित पुस्तक “स्मरण-रेखा” का निर्माण विश्वविद्यालय स्तरीय हिंदी साहित्य के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों, अध्यापकों, शोधार्थियों एवं साहित्य-प्रेमियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है| वर्तमान समय में हिंदी गद्य की विविध विधाओं का अध्ययन केवल परीक्षा-उन्मुख दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साहित्य को सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है| इसी उद्देश्य से इस पुस्तक में संस्मरण और रेखाचित्र दोनों विधाओं की सैद्धांतिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ प्रतिनिधि रचनाओं को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है, ताकि पाठक इन विधाओं के स्वरूप, संवेदना, शैली तथा साहित्यिक महत्त्व को समग्रता में समझ सकें| 
पुस्तक के प्रथम अध्याय “संस्मरण की सैद्धांतिकी” में संस्मरण की परिभाषा, उद्भव, विकास, स्वरूप, तत्व, विशेषताएँ तथा उसकी रचनात्मक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार किया गया है| हिंदी साहित्य में संस्मरण विधा का विकास आधुनिक काल में विशेष रूप से हुआ| इस विधा ने साहित्य को आत्मीयता, अनुभूति और यथार्थ की नई दृष्टि प्रदान की| संस्मरणों में लेखक केवल घटनाओं का वर्णन नहीं करता, बल्कि उन घटनाओं से जुड़े भावबोध, मानवीय संबंधों और सामाजिक परिस्थितियों का भी सजीव चित्रण करता है| इस अध्याय में संस्मरण की आत्मपरकता, विश्वसनीयता, संवेदनात्मकता और कलात्मकता जैसे महत्त्वपूर्ण पक्षों का विश्लेषण किया गया है| 4 | प्रशांत पब्लिकेशन्स 
द्वितीय अध्याय में हिंदी साहित्य के प्रमुख संस्मरणकारों की प्रतिनिधि रचनाओं को सम्मिलित किया गया है| महात्मा गांधी का “प्रथम सत्याग्रही विनोबा” केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और विचारधारा का प्रेरणादायी दस्तावेज है| सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की “चतुरी चमार” में समाज के उपेक्षित वर्ग के प्रति गहरी मानवीय संवेदना दिखाई देती है| हरिशंकर परसाई के “आँगन में बैंगन” में व्यंग्य और जीवनानुभव का अनूठा समन्वय मिलता है| अज्ञेय के “जेल के दिन” में स्वतंत्रता आंदोलन और वैचारिक संघर्षों की झलक दिखाई देती है, जबकि कृष्णा सोबती का “बचपन” स्मृतियों की आत्मीय दुनिया को अत्यंत मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है| 
इसी प्रकार मृदुला गर्ग, विष्णु प्रभाकर, गोविन्द मिश्र तथा उपेंद्रनाथ अश्क जैसे साहित्यकारों की रचनाएँ संस्मरण विधा को विविध आयाम प्रदान करती हैं| इन रचनाओं के माध्यम से पाठक न केवल साहित्यिक संवेदनाओं से परिचित होता है, बल्कि भारतीय समाज, संस्कृति, राजनीति और मानवीय संबंधों की गहराइयों को भी समझ पाता है| 
तृतीय अध्याय “रेखाचित्र की सैद्धांतिकी” में रेखाचित्र विधा की मूल अवधारणा को स्पष्ट किया गया है| रेखाचित्र साहित्य की ऐसी विधा है, जिसमें कम शब्दों में किसी व्यक्तित्व या दृश्य का प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत किया जाता है| यह विधा अपनी संक्षिप्तता, सजीवता और चित्रात्मकता के कारण विशेष महत्त्व रखती है| इस अध्याय में रेखाचित्र की परिभाषा, उद्भव, विकास, तत्व और विशेषताओं का विस्तारपूर्वक विवेचन किया गया है| साथ ही संस्मरण और रेखाचित्र के मध्य के मूलभूत अंतरों को भी स्पष्ट किया गया है| जहाँ संस्मरण अनुभव और स्मृति पर आधारित होता है, वहीं रेखाचित्र व्यक्तित्व अथवा घटना की तात्कालिक छवि को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता है| 
चतुर्थ अध्याय में हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण रेखाचित्रों को स्थान दिया गया है| रामवृक्ष बेनीपुरी का “बालगोबिन भगत” भारतीय ग्रामीण जीवन और लोक-संस्कृति का अत्यंत सजीव चित्र प्रस्तुत करता है| महादेवी वर्मा का “घीसा” करुणा, संवेदना और मानवीय संबंधों की गहराई का उत्कृष्ट उदाहरण है| राहुल सांकृत्यायन का “रूपी” तथा धर्मवीर भारती का “आधी रात : रेल की सीटी” रेखाचित्र विधा की कलात्मक ऊँचाइयों को उद्घाटित करते हैं| इसी प्रकार देवेंद्र सत्यार्थी, अमृतराय तथा कृष्णा सोबती की रचनाएँ हिंदी गद्य की बहुआयामी संवेदनशीलता का परिचय देती हैं| स्मरण-रेखा | 5 
यह पुस्तक केवल पाठ्यक्रम की पूर्ति के उद्देश्य से तैयार नहीं की गई है, बल्कि इसका प्रयोजन विद्यार्थियों में साहित्यिक समझ, आलोचनात्मक दृष्टि और संवेदनात्मक बोध का विकास करना भी है| आज के तकनीकी और भौतिकतावादी युग में मनुष्य के अनुभव, स्मृतियाँ और संबंध तेजी से बदल रहे हैं| ऐसे समय में संस्मरण और रेखाचित्र जैसी विधाएँ हमें मनुष्य की आत्मीयता, सामाजिकता और संवेदनशीलता से जोड़ती हैं| ये विधाएँ साहित्य को जीवन से जोड़ने का कार्य करती हैं और पाठक को अपने समय और समाज के प्रति अधिक सजग बनाती हैं| 
संपादन कार्य के दौरान यह प्रयास किया गया है कि पुस्तक की भाषा सरल, स्पष्ट एवं विद्यार्थियों के अनुकूल रहे| विषय-वस्तु को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करते हुए सैद्धांतिक पक्ष और रचनात्मक पक्ष के मध्य संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है| हमें विश्वास है कि यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा अध्यापकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी और हिंदी साहित्य की इन महत्त्वपूर्ण विधाओं के अध्ययन-अध्यापन में सहायक बनेगी| 

अध्याय 1..............................................................9
संस्मरण की सैध्दांतिकी
1. संस्मरण : अवधारणा और अर्थ
2. संस्मरण की परिभाषाएँ
3. हिंदी संस्मरण का उद्भभव एवं विकास
4. संस्मरण के तत्व
5. संस्मरण का वर्गीकरण
6. संस्मरण की विशेषताएँ
7. संस्मरण की परिस्थितियाँ

अध्याय 2............................................................41
हिंदी के श्रेष्ठ संस्मरण
1. प्रथम सत्याग्रही विनोबा - महात्मा गांधी
2. चतुरी चमार - सूर्यकांत त्रिपाठी ‌‘निराला‌’
3. चौधरी बिहारीलाल - कन्हैयालाल मिश्र ‌‘प्रभाकर‌’
4. जिंदादिल बेढब बनारसी - अमृतलाल नागर
5. आँगन में बैंगन - हरिशंकर परसाई
6. एक था टी हाउस - शेरजंग गर्ग
7. मेरे संग की औरतें - मृदुला गर्ग
8. एक नेत्रहीन की दृष्टि : एक चित्र - विष्णु प्रभाकर
9. सतपुड़ा के भीतर से - गोविन्द मिश्र
10. आँसमा और भी है - उपेंद्रनाथ अश्क
11. जेल के दिन - अज्ञेय
12. बचपन - कृष्णा सोबती
13. सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है - मन्मथनाथ गुप्त
14. श्रीमती महादेवी वर्मा - नगेंद्र
15. अरुंधती - शिवानी

अध्याय 3...........................................................136
रेखाचित्र की सैध्दांतिकी
1. रेखाचित्र की परिभाषाएँ
2. रेखाचित्र का उद्भव एवं विकास
3. रेखाचित्र के तत्व
4. रेखाचित्र की शैलियाँ
5. रेखाचित्र के गुण
6. रेखाचित्र प्रवृत्तियाँ
7. रेखाचित्र की विशेषताएं
8. रेखाचित्र का वर्गीकरण
9. संस्मरण और रेखाचित्र में अंतर

अध्याय 4...........................................................167
हिंदी के श्रेष्ठ रेखाचित्र
1. लल्लू कब लौटेगौ - बनारसीदास चतुर्वेदी
2. बालगोबिन भगत - रामवृक्ष बेनीपुरी
3. उड गए फुलवा रह गई बास - भदन्त आनंद कौशल्यायन
4. घीसा - महादेवी वर्मा
5. चन्दा - श्रीराम शर्मा
6. टीपू सुलतान - विष्णु प्रभाकर
7. हम हशमत - भीष्म साहनी - कृष्णा सोबती
8. गीली मिट्टी - अमृतराय
9. संयोग - सत्यवती मल्लिक
10. डबली बाबू - विनय मोहन शर्मा
11. आधी रात : रेल की सीटी - धर्मवार भारती
12. रूपी - राहुल सांकृत्यायन
13. बैलगाडी - बेढब बनारसी
14. राजा की मंडी - प्रकाशचंद्र गुप्त
15. गोधूलि - देवेंद्र सत्यार्थी

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