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अशोक नामदेव पळवेकर की कविता अपने समकालीन सामाजिक-राजकीय वास्तव की एक प्रगल्भ कालसंहिता है|
भारतीय समाज व्यवस्था में आज का वास्तव प्रस्तुत करते हुए यह कविता आसपास के साधारण मनुष्यों के...

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असहमति के रंग
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अशोक नामदेव पळवेकर की कविता अपने समकालीन सामाजिक-राजकीय वास्तव की एक प्रगल्भ कालसंहिता है|
भारतीय समाज व्यवस्था में आज का वास्तव प्रस्तुत करते हुए यह कविता आसपास के साधारण मनुष्यों के जीने में तनावों के साथ ही समाज में निहित धार्मिक-जातिय असहिष्णुता, क्रौर्य, दहशत, पुरुष सत्ताक हिंस्रता और हाल के समय सत्ताधिशों के बर्ताव में सामाजिक-राजकीय पाखंड व मूलतत्त्ववादी विचार प्रणाली से फैलने वाला धार्मिक-साँस्कृतिक उन्माद, कट्टरवाद आदि के अत्यधिक प्रभाव में ध्वस्त हो रही जनतांत्रिक यंत्रणा के सामाजिक व मानवीय मूल्य, साथ ही सरमायादारी आक्रमकता, सत्ताशरण माध्यम-प्रशासन-न्याय यंत्रणा वग़ैरह के भिन्न-भिन्न वास्तव रूप भी अत्यंत उग्र व आक्रमक स्वरूप में अपनी स्वतंत्र शैली से अभिव्यक्त करती है|
आंबेडकरवादी जीवन दृष्टि में संवेदनशीलता इस कविता का स्वभाव होते हुए विश्व मानवतावाद के व्यापक परिघ-केन्द्र से इस कविता की आँवल नाल जुड़ी हुई है| अतः यह कविता आसपास के मानवीय दुःख-प्रतीतियों से कतई सहजभाव से एकरूप होती है, और न्याय-अन्याय के कड़े संघर्ष में न्याय के पक्ष में अपनी निर्णायक भूमिका घोषित करती है| विवेकशील लड़ाकूपन इस कविता का एक महत्त्वपूर्ण पहलु होने से मानवीय स्तर पर विश्व संवेदना एवं जीवन एहसासों का ऐतिहासिक संचित इस कविता में अव्याहत प्रवाहित होते हुए दिखता है, और सामाजिक दुःख भान का एक करुणामय व विद्रोही दर्शन उस में प्रगल्भता से साकार होता है|
इस कविता में तत्त्वचिंतन और समकालीन वास्तव का सारा ही भान ध्यान में रखते हुए यह कविता यानी अपने समकाल के सामाजिक-राजकीय पर्यावरण में अत्यंत कडुआ एवं गर्म रंग दर्शानेवाली भिन्न-भिन्न स्थिति गति के काल-कोलाहल का एक मौलिक धन है|

1. काल नहीं बदलता कभी!, 2. मैंने, घोषित किया है ईश्वर का मृत्यु, 3. ओ, जीनिअस!, 4. कालाय तस्मै नमः, 5. पाहोम, 6. ‌‘शिकारी, कबूतर और चींटी’ की कहानी सम्बंधी, 7. गाँव में आए हुए मदारी की कहानी, 8. राजनीति, 9. पतझड़, 10. दे आर टोटली मिस्फिट फॉर दॅट!, 11. प्रतिज्ञा, 12. प्रयोग : अर्थात, कौन सुलगा रहा है देश?, 13. जंतर मंतर, 14. क्या, चल क्या रहा है, इस देश में?, 15. यह देश बेचना है!, 16. लाल किले से…!, 17. सत्तांतर, 18. सत्ता के कछुए का कवच!, 19. जनतंत्र, 20. एनकाऊन्टर!, 21. युद्धोन्माद, 22. युद्ध विराम, 23. एक स़फर की बात!, 24. गू-गंदगी की राजनीति में नौटंकी!, 25. पंचकुला : 25 अगस्त 2017, 26. भूलभुलैय्या, 27. पीछा, 28. मेक इन इन्डिया : नालासोपारा, 29. मॉब लिचिंग, 30. सलमान भाय!, 31. एक बातचीत : नसीरुद्दीन शहा से, 32. रोज़ा, 33. एक निवेदन, 34. मेरी आयु की आँखों में, 35. आँच, 36. तू़फान!, 37. मानसिकता, 38. एक अवस्था, 39. जग की रीति, 40. नोट बंदी, 41. ॲनिवरसरी ऑफ नोट बंदी!, 42. स्टेचू ऑफ युनिटी : एक निमित्त, 43. घर का भेदी, 44. मीड़िया, 45. न्याय का देवता, 46. गाँधी : एक निमित्त, 47. नयी तालीम, 48. न किए हुए गुनाह की सज़ा भुगतनेवाला कैदी!, 49. धर्मा मांगा पाटील, 50. मनू , 51. जाति, 52. जाति कीड़ा, 53. खैरलांजी, 54. सीरिया, 55. उन्नाव-कठुआ : एक निमित्त, 56. संजलि गौतम, 57. कुक्कुस, 58. फुलन, 59. रोहित वेमुला, 60. स्टिल विथ अस!, 61. सिद्धार्थ गौतम बुद्ध, 62. कबीरा, 63. जोतिराव गोविंदराव फुले, 64. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (1), 65. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (2), 66. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (3), 67. रमाई, 68. डॉ. माईसाहेब आंबेडकर, 69. दीक्षाभूमि की कविता, 70. भीमा-कोरेगाँव विजय स्तंभ (1), 71. भीमा-कोरेगाँव विजयस्तंभ (2), 72. भक्त (1), 73. भक्त (2), 74. भूख, 75. बैल, 76. बकरा, 77. दुष्ट, 78. ॲन्टिक फर्क़, 79. अजेंडा, 80. मैं!, 81. भूमिका, 82. असहमति के रंग, 83. विदग्ध, 84. विद्या बाळ, 85. स्त्री-सूक्त : तुम्हारी नज़र में मैं, 86. चश ढेे!, 87. पेड़, 88. एक मार्च, 89. इक्कीस जून दो हज़ार उन्नीस, 90. जान उचाड़ती है, 91. गोत्र, 92. ऐसे वक़्त, 93. मृत्यु, 94. ॲडॉल्फ हिटलर की चरित्र कथा, 95. जार्ज, 96. फिडेल, आप मर नहीं सकते!, 97. बर्टोल्ट ब्रेख्त : एक संवाद, 98. कल, पाब्लो मुझे मिले!, 99. क्या डेंजर हवा बह रही है!, 100. श्रद्धांजलि.

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