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“बालिका शिक्षा में शिक्षिकाओं की भूमिका” मेरा लेखन की ओर पहला प्रयास है| यह औरतों के प्रति मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति है| बेटियाँ -यूँ तो पैदा होने पर लक्ष्मी का अवतार मानी जाती है, परंतु जैसे-जैसे ये बेटी बड़ी होती जाती है उसके समक्ष अनेक समस्याएं उत्पन्न होती है और जैसा कि कहा भी गया है कि ‘कत बिधि सृजीं नारी जग माही, पराधीन सपनेहू सुख नाही”| इस तरह भारत में औरतों की दयनीय स्थिती से तो हर कोई वाकिफ है, फिर भी एक महिला शिक्षिका होनेके नाते मेरा ये दायित्व है कि मैं बालिकाओं से जुड़े हर पहलू पर प्रकाश डालू|