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Welcome to Prashant Publications
| INTERNATIONAL | XS | S | M | L | XL | XXL | XXXL |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| EUROPE | 32 | 34 | 36 | 38 | 40 | 42 | 44 |
| US | 0 | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
| CHEST FIT (INCHES) | 28" | 30" | 32" | 34" | 36" | 38" | 40" |
| CHEST FIT (CM) | 716 | 76 | 81 | 86 | 91.5 | 96.5 | 101.1 |
| WAIST FIR (INCHES) | 21" | 23" | 25" | 27" | 29" | 31" | 33" |
| WAIST FIR (CM) | 53.5 | 58.5 | 63.5 | 68.5 | 74 | 79 | 84 |
| HIPS FIR (INCHES) | 33" | 34" | 36" | 38" | 40" | 42" | 44" |
| HIPS FIR (CM) | 81.5 | 86.5 | 91.5 | 96.5 | 101 | 106.5 | 111.5 |
| SKORT LENGTHS (SM) | 36.5 | 38 | 39.5 | 41 | 42.5 | 44 | 45.5 |
1. माध्यमिक स्तरावरील मातृभाषेचा अभ्यासक्रम :
1.1 मातृभाषा शिक्षणाची उद्दिष्टे
1.2 अभ्यासक्रमाची तत्वे
1.3 अभ्यासक्रमाचे प्रकार
1.4 चांगल्या अभ्यासक्रमाची वैशिष्टे
1.5 अभ्यासपूरक आणि अभ्यासेत्तर उपक्रम
2. माध्यमिक स्तरावरील मराठीचे अध्यापन :
2.1 गद्याचे अध्यापन स्वरूप आणि वैशिष्टे
2.2 काव्याचे अध्यापन स्वरूप आणि वैशिष्टे
2.3 व्याकरणाचे अध्यापन स्वरूप आणि वैशिष्टे
2.4 मराठी भाषेची वैशिष्टे आणि स्वरूप
2.5 पाठाचे पृथ्थकरण : उद्दिष्टे आणि स्पष्टीकरण (उच्चस्तरीय)
2.6 अध्यापन पद्धती आणि अध्ययन अनुभव.
3. मातृभाषा अध्यापनाची तंत्रे, पद्धती व प्रतिमाने :
3.1 मातृभाषा अध्यापनाची तंत्रे : स्वयंम् अध्ययन, मुलाखत तंत्र, क्रमान्वित अध्ययन तंत्र, स्वाध्याय तंत्र, बुद्धिमंथन तंत्र
3.2 मातृभाषा अध्यापनाच्या पद्धती : व्याख्यान पद्धती, संभाषण पद्धती, तौलनिक पद्धती, ग्रंथालय पद्धती, परिसंवाद
3.3 अध्यापनाची प्रतिमाने : सृजनशील प्रतिमान, उद्गमन प्रतिमान, संकल्पना प्रतिमान, पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान.
3.4 गाभा घटक, जीवन कौशल्ये आणि मूल्ये
3.5 मातृभाषा अध्यापनात माहिती संप्रेषण तंत्रज्ञाना (खउढ) चा उपयोग.
4. उच्चस्तरीय गद्य, पद्य वाङ्मय प्रकाराची स्थूल ओळख :
4.1 विविध वाङ्मय प्रकाराच्या अध्यापनाची दिशा.
4.2 गद्य साहित्य प्रकार : बखर, निबंध (ललित आणि वैचारिक) शब्दचित्र, कादंबरी, व्यक्तिचित्र, आत्मकथन
4.3 विद्यार्थ्यांना काव्याची गोडी लावण्यासाठी विविध शैक्षणिक उपक्रम.
4.4 पद्य साहित्य प्रकार – पंडीती काव्य, जानपदगीत, सुनित, लावणी, मुक्तछंद.
4.5 काव्य पाठांतराचे महत्त्व
5. व्याकरण :
5.1 अ) शब्दालंकार : अनुप्रास, यमक, श्लेष
ब) अर्थालंकार : अपन्हुती, व्यक्तिरेक, रूपक, उत्प्रेक्षा
5.2 अ) अक्षरगणवृत्त : भुजंगप्रयास, शार्दुलविक्रिडीत, वसंततिलका आणि मंदारमाला.
ब) मात्रावृत्त, दिंडी, पादाकुलक, आर्या, नववधू.
5.3 छंद आणि मुक्तछंद
5.4 शब्दसिद्धी, काव्यगुण, शब्दशक्ती
5.5 रस आणि रसांचे मुख्य प्रकार
6. उपयोजित मराठी :
6.1 दैनंदिनी लेखन
6.2 अहवाल लेखन
6.3 सारांश लेखन व आकलन
6.4 बातमी लेखन आणि जाहिरात लेखन
6.5 संगणकाची भाषा
7. मातृभाषा शिक्षकाचा व्यावसायिक विकास :
7.1 व्यावसायिक विकासाचा अर्थ, स्वरूप
7.2 व्यावसायिक विकासाची गरज आणि महत्त्व
7.3 शिक्षकांच्या व्यावसायिक विकासासाठी उपक्रम
7.4 सेवांतर्गत प्रशिक्षणाची संकल्पना, स्वरुप व महत्त्व
7.5 मराठी भाषा शिक्षकांची संघटना, भूमिका आणि महत्त्व
7.6 शिक्षण आणि ऑनलाईन शिक्षण
7.7 शालेय शिक्षण आणि व्यावसायिक बदल
7.8 ऑनलाइन शिक्षण आणि डिजिटल शिक्षण
8. बोलींचा परिचय व वाङ्मयीन संस्था :
8.1 बोलीभाषा अर्थ, संकल्पना
8.2 बोलीभाषा आणि प्रमाणभाषा यातील फरक
8.3 महाराष्ट्रातील बोली – चंदगडी बोली, हळवी बोली, वऱ्हाडी बोली, बंजाराबोली, झाडीबोली, मालवणी बोली, अहिराणी बोली, तावडी बोली, लेवागणबोली
8.4 मातृभाषा संवर्धनासाठी असलेल्या वाङ्मयीन संस्था
8.5 मराठीच्या अध्यापनासाठी विविध संकेतस्थळांचा उपयोग