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यशपाल प्रेमचंदोत्तर परंपरा के सशक्त कहानीकार है। उनकी प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने उपन्यास, कहानियाँ, नाटक, निबन्ध, आत्मकथा, यात्रावर्णन तथा अनुदित साहित्य का लेखन किया है। उन्होंने लगभग 250 कहानियाँ लिखी...

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यशपाल का कथा साहित्य
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यशपाल प्रेमचंदोत्तर परंपरा के सशक्त कहानीकार है। उनकी प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने उपन्यास, कहानियाँ, नाटक, निबन्ध, आत्मकथा, यात्रावर्णन तथा अनुदित साहित्य का लेखन किया है। उन्होंने लगभग 250 कहानियाँ लिखी है। उनके 17 कहानी संग्रह है। उनमें पिंजरे की उडान, वो दुनिया, ज्ञानदान, अभिशप्त, तर्क का तुफान, धर्मयुद्ध, उत्तमी की माँ, सच बोलने की भूल, फूलोंका कुर्ता, चित्रका शिर्षक, ओ भैरवी, लैम्पशेड, खच्चर और आदमी आदि प्रमुख है।

यशपाल की कहानियोंमें युगजीवन की असंगतियों एवं व्यवस्था की विकृतियों का चित्रण है। मानव जीवनसे सम्बन्धित सभी समस्याओं का उद्घाटन यशपाल की कहानियोंमें मिलता है। यशपाल मार्क्सवादी है; अतः साम्यवाद की स्थापना करना उनका अभिष्ट है। आजकी पूँजीवादी व्यवस्थाको नष्टकर वर्गहीन समाजव्यवस्था का निर्माण करना यशपाल ध्येय है। यशपाल ने समाजमें प्रलित कुरीतियों, खोखले आदर्शोपर करारा व्यंग्य किया है। संकीर्ण मानसिकतासे ग्रस्त व्यक्ति को विकासोन्मुख गति की ओर अग्रेसर होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

निस्संदेह प्रस्तुत ग्रंथ यशपाल तथा उनका कथा साहित्य का अध्ययन, अनुसंधान कर्ताओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

यशपाल : जीवनरेखा
यशपाल आत्मकथन : जीवन संघर्ष
यशपाल और उनका साहित्य
यशपाल का साहित्य विषयक दृष्टिकोन
मार्क्सवाद, गाँधीवाद और यशपाल
यशपाल की कहानियोंका वर्गीकरण
आर्थिक समस्या प्रधान कहानियाँ
यौनविषयक कहानियाँ
धार्मिक अंधश्रध्दा तथा परंपरा विरोधी कहानियाँ
राजनीतिक कहानियाँ
कथा साहित्य : उपलब्धि

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