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इस पुस्तक का उद्देश्य केवल सृजनात्मक लेखन-कौशल का परिचय देना नहीं है, बल्कि पाठकों के भीतर निहित रचनात्मक प्रतिभा को जागृत करना, उनकी अभिव्यक्ति को सशक्त बनाना तथा उन्हें आधुनिक...

  • Name : सृजनात्मक लेखन एवं कौशल विकास
  • Vendor : Prashant Publication
  • Type : TYBA | V | Hindi
  • Manufacturing : August 2026
  • Total Pages : 168 Pages
  • Barcode : 9789377761783

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सृजनात्मक लेखन एवं कौशल विकास
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इस पुस्तक का उद्देश्य केवल सृजनात्मक लेखन-कौशल का परिचय देना नहीं है, बल्कि पाठकों के भीतर निहित रचनात्मक प्रतिभा को जागृत करना, उनकी अभिव्यक्ति को सशक्त बनाना तथा उन्हें आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विविध कौशलों से समृद्ध करना है| परिवर्तित शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘सृजनात्मक लेखन एवं कौशल विकास’ पुस्तक का लेखन किया गया है| यह पुस्तक केवल भाषा और साहित्य के अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में सृजनात्मक चिंतन, आलोचनात्मक दृष्टि, संप्रेषण दक्षता, अभिव्यक्ति कौशल, समस्या-समाधान, क्षमता, नवाचार, नेतृत्व, सहयोगात्मक अधिगम तथा जीवनोपयोगी कौशलों के विकास का एक अल्प प्रयासभर है| हमारा विश्वास है कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह व्यक्ति को आत्मविश्वासी, संवेदनशील, नैतिक तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाते हुए उसे जीवन और रोजगार दोनों के लिए सक्षम बनाए|
सृजनात्मक लेखन मनुष्य की कल्पनाशीलता, अनुभव, संवेदना और बौद्धिक क्षमता का सशक्त माध्यम है| यह केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति की विधा नहीं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन, मौलिकता, तार्किकता तथा सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करने की रचनात्मक प्रक्रिया है| पुस्तक में सृजनात्मक लेखन का अर्थ, स्वरूप, उसकी प्रकृति, विशेषताएँ, विभिन्न विधाएँ, भाषा की भूमिका, अभिव्यक्ति की तकनीक, लेखन प्रक्रिया आदि को सरल एवं सुबोध रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है| इसमें भाषा संवर्धन, डिजिटल लेखन, सोशल मीडिया लेखन और स्वरोजगार के अवसर इन विषयों पर भी चर्चा की है| क्योंकि आज लेखक को मात्र ‘लिखना’ नहीं तो ‘बाजार’ भी समझना होगा| हमें लगता है कि यह पुस्तक छात्र के भीतर के ‘लेखक’ को आवाज जरुर देगी| हम छात्रों से अनुरोध करते हैं कि पुस्तक पढ़कर कलम उठाएं और लिखें| क्योंकि लेखन तैरने की तरह है| पुस्तकें पढ़कर तैरना नहीं सीखा जाता, पानी में उतरना पड़ता है|
यह पुस्तक कल्पना को कौशल से और संवेदना को अभिव्यक्ति से जोड़ने वाला सेतु बन सकती है| इसमें सृजनात्मक लेखन का अर्थ, स्वरूप, महत्त्व और प्रमुख तत्त्वों- कल्पना, संवेदना, अनुभव का विवेचन किया गया है| कविता, गीत, कहानी, लघुकथा, उपन्यास, नाटक, एकांकी, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, रिपोर्ताज, डायरी आदि सभी प्रमुख विधाओं का स्वरूप, विशेषताएँ और लेखन-कौशल उदाहरण सहित बताया गया है| साथ ही प्रायोगिक कार्य की भी चर्चा है| रोजगारपरक कौशलों के साथ आज का छात्र लेखक बने, कंटेंट राइटर, ब्लॉगिंग, एंकरिंग, स्क्रिप्ट राइटर भी बन सके इसका भी ध्यान रखने का प्रयास किया गया है| हम समझते हैं कि ‘सृजनात्मक लेखन एवं कौशल विकास’ केवल एक पुस्तक नहीं, यह एक कार्यशाला है, जो छात्र को ‘पाठक से’ ‘स्रष्टा’-‘सृजक’ बनाने का प्रयास करती है| अंत में यही कहना चाहेंगे- अनुभव कच्चा माल है, संवेदना उसे रंगती है और सृजनात्मक कौशल उसे आकार देता है| यदि यह पुस्तक एक भी छात्र को लिखने के लिए प्रेरित कर सकी, तो हमारे श्रम की सार्थकता होगी|

1. सृजनात्मक लेखन का परिचय..................................19
1.0 भूमिका
1.1 सृजनात्मक लेखन
1.2 सृजनात्मक लेखन का स्वरूप
1.3 सृजनात्मक लेखन का महत्त्व
1.4 सृजनात्मक लेखन के प्रमुख उद्देश्य
1.5 सृजनात्मकता के प्रेरक तत्त्व
1.6 अनुभव, कल्पना और संवेदना का पारस्परिक संबंध
1.7 सामान्य लेखन और सृजनात्मक लेखन में अंतर
1.8 सृजनात्मक लेखन के प्रकार
1.9 निष्कर्ष

2. सृजनात्मक लेखन की प्रक्रिया एवं विकास कौशल..............45
2.0 भूमिका
2.1 सृजनात्मक लेखन की प्रक्रिया
2.2 सृजनात्मक लेखन की अवधारणा
2.3 सृजनात्मक लेखन की प्रक्रिया एवं विकास कौशल
2.4 सृजनात्मक लेखन की प्रक्रिया
2.5 सृजनात्मक लेखन की चरणबद्ध प्रक्रिया
2.6 सृजनात्मक लेखन के विकास कौशल
2.7 चिंतन एवं आलोचनात्मक सोच
2.8 सृजनात्मक लेखन में आलोचनात्मक सोच की भूमिका
2.9 आलोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन का संबंध
2.10 आलोचनात्मक सोच के विकास की तकनीकें
2.11 शब्द-भंडार विकास
2.12 पर्याय, विलोम, मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ
2.13 शब्द-निर्माण की तकनीकें
2.14 भाषिक समृद्धि के उपाय
2.15 अभिव्यक्ति कौशल 2.16 रचनात्मक अभ्यास 2.17 डिजिटल एवं AI-सहायित लेखन कौशल 2.18 ब्लॉग, ई-पुस्तक एवं वेब लेखन 2.19 AI का सहायक उपयोग 2.20 तथ्य-जाँच 2.21 अकादमिक ई ानदारी एवं साहित्यिक चोरी से बचाव 2.22 लेखक के व्यक्तित्व का विकास 2.23 समग्र मॉडल (सृजनात्मक लेखन कौशल का समग्र मॉडल)

3. सृजनात्मक लेखन एवं कौशल विकास ........................ 119
3.0 भूमिका 3.1 लघुकथा लेखन 3.2 कथा लेखन 3.3 कविता लेखन 3.4 संस्मरण लेखन 3.5 यात्रा-वृत्तांत लेखन 3.6 ब्लॉग लेखन 3.7 विज्ञापन लेखन 3.8 अन्य महत्वपूर्ण सृजनात्मक लेखन विधाएँ 3.9 सृजनात्मक लेखन से विकसित होने वाले कौशल 3.10 निष्कर्ष

4. सृजनात्मक लेखन : प्रायोगिक कार्य........................... 159
4.0 भूमिका 4.1 गद्य अथवा पद्य रचना का निर्माण 4.2 सृजनात्मक लेखन फाइल का निर्माण 4.3 सहपाठी के सृजनात्मक लेखन की समीक्षा 4.4 समीक्षा का प्रारूप 4.5 सृजनात्मक लेखन का शैक्षिक महत्त्व

संदर्भ ग्रंथ......................................................... 165

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