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शिक्षाशास्त्र महाविद्यालय में शिक्षण कार्य का दो दशकों से ज्यादा का अनुभव ने मुझे इस पुस्तक को लिखने के लिए प्रेरित किया। मैंने यह महसूस किया कि छात्रों के समक्ष समग्रता के साथ विषय को प्रस्तुत करना ज़रूरी है। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रचलित अधिकतर पुस्तकों के लेखकों ने भी अपनी तरफ से उच्च स्तर का कार्य किया है। इसके बावजूद हिंदी शिक्षण में आए बदलाव को आधुनिकता के साथ जोड़कर तथा समग्रता एवं सहजता से विषय को प्रस्तुत करने की कमी मुझे खलती रही है। इसी अभाव की पूर्ति के लिए मेरे द्वारा किया गया यह एक छोटा सा प्रयास है।
पुस्तक की भाषा सरल, प्रवाहमयी एवं सहजग्राह्य बनाने का यथासंभव प्रयास किया गया है, जिससे कि प्रथम भाषा एवं द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के सभी पाठकों को आसानी से समझ में आ सके। पुस्तक में उन सभी सामग्रियों को समाविष्ट किया गया है जो प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक कार्यरत शिक्षकों, शिक्षक-प्रशिक्षकों एवं छात्रों के लिए ज़रूरी हैं।
अध्ययन, अध्यापन एवं परीक्षा की दृष्टिकोण से प्रस्तुत पुस्तक बहुत उपयोगी साबित होगी। इस प्रकार यह पुस्तक डी.एल.एड., बी.एड., बी.एड. एम.एड. एकीकृत, चार वर्षीय एकीकृत बी.एड. कोर्स के लिए निश्चित उपयोगी है।
१.१ प्रस्तावना
१.२ भाषा की परिभाषा
१.३ भाषा संबंधित दृष्टिकोण
१.४ भाषा की विशेषताएँ
१.५ भाषा का महत्त्व एवं कार्य
१.६ भाषा के रूप
१.६.१ प्रयोग की दृष्टि से भाषा के रूप
१.६.२ भौगोलिक विभिन्नता एवं बहुभाषिकता की दृष्टि से हिंदी भाषा के रूप
१.७ हिंदी भाषा की स्थिति
१.७.१ स्वतंत्रता से पूर्व हिंदी की स्थिति
१.७.२ स्वतंत्र भारत में हिंदी की स्थिति-हिंदी की संवैधानिक स्थिति
१.८ बहुभाषिक देश में राष्ट्रभाषा की आवश्यकता
अध्याय २ : अहिंदी प्रदेशों में हिंदी का अध्ययन एवं अध्यापन.................४७
२.१ प्रस्तावना
२.२ द्वितीय या अन्य भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
२.३ अन्य भाषा शिक्षण के सिद्धांत
२.४ अहिंदी प्रदेशों में हिंदी शिक्षण की समस्याएँ
२.५ बहुभाषिकता की समस्या तथा भाषा शिक्षण नीति
२.५.१ द्विभाषा सूत्र
२.५.२ त्रिभाषा सूत्र
२.५.३ महाराष्ट्र के पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा का स्थान
अध्याय ३ : हिंदी भाषा शिक्षण के उद्देश्य......................................६०
३.१ प्रस्तावना
३.२ पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
३.३ प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा ५, ६, ७ एवं ८) पर हिंदी भाषा शिक्षा के सामान्य उद्देश्य
३.४ माध्यमिक स्तर (कक्षा ९ एवं १०) पर हिंदी भाषा शिक्षा के सामान्य उद्देश्य
३.५ उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा ११ एवं १२) पर हिंदी भाषा शिक्षण के सामान्य उद्देश्य
३.६ कक्षा अध्यापन के उद्देश्य एवं उनका स्पष्टीकरण
३.७ हिंदी भाषा शिक्षण के व्यापक उद्देश्य
३.७.१ राष्ट्रीय उद्देश्य
३.७.२ सांस्कृतिक उद्देश्य
३.७.३ साहित्यिक उद्देश्य
३.७.४ भाषिक उद्देश्य
३.७.५ व्यावहारिक उद्देश्य
अध्याय ४ : हिंदी भाषा और समवाय..........................................८३
४.१ प्रस्तावना
४.२ समवाय का अर्थ
४.३ समवाय के प्रकार
४.३.१ क्षैतिज या क्षितिज समवाय
४.३.२ ऊर्ध्वाधर या लंबीय समवाय
४.४ हिंदी भाषा का अन्य विषयों से समवाय
४.५ समवाय कैसा हो
४.६ समवाय के लाभ
४.७ समवाय के दोष
अध्याय ५ : शैक्षिक नियोजन..................................................९०
५.१ प्रस्तावना
५.२ वार्षिक योजना
५.३ वार्षिक योजना कैसी हो
५.४ वार्षिक योजना के तत्व (घटक)
५.५ वार्षिक योजना का महत्त्व
५.६ इकाई योजना
५.७ इकाई योजना के अंग/भाग
५.८ इकाई योजना के लाभ
५.९ पाठ योजना
५.१० पाठ योजना की विशेषताएँ
५.११ पाठ योजना के सोपान (सीढ़ियाँ)
५.१२ पाठ योजना के लाभ
अध्याय ६ : श्रवण कौशल...................................................११०
६.१ प्रस्तावना
६.२ श्रवण कौशल
६.३ श्रवण कौशल के अंग
६.३.१ यांत्रिक अंग
६.३.२ बौद्धिक अंग
६.४ श्रवण के उद्देश्य
६.५ श्रवण दोष
६.६ श्रवण दोष दूर करने के उपाय
६.७ श्रवण कौशल का विकास
६.७.१ कक्षा शिक्षण के दौरान
६.७.२ सह शैक्षिक क्रियाओं के दौरान ६.७.३ कक्षोत्तर/कक्षा बाह्य कार्यकलापों के दौरान
अध्याय ७ : भाषण कौशल..................................................१२५
७.१ प्रस्तावना
७.२ भाषण कौशल के अंग (विविध पक्ष)
७.३ भाषण/मौखिक अभिव्यक्ति के रूप
७.४ भाषण के उद्देश्य
७.५ भाषण दोष
७.६ भाषण दोष दूर करने के उपाय
७.७ भाषण कौशल का विकास
अध्याय ८ : पठन कौशल....................................................१३८
८.१ प्रस्तावना
८.२ पठन के प्रकार
८.२.१ सस्वर पठन
८.२.१.१ सस्वर पठन की विशेषताएँ
८.२.१.२ सस्वर पठन में ध्यान रखने की बातें
८.२.१.३ सस्वर पठन के लाभ
८.२.१.४ सस्वर पठन का क्रम
८.२.१.५ सस्वर पठन के प्रकार
८.२.१.५.१ आदर्श पठन
८.२.१.५.२ आदर्श पठन के उद्देश्य
८.२.१.६ अनुकरण पठन
८.२.१.६.१ अनुकरण पठन के उद्देश्य
८.२.२ मौन पठन
८.२.२.१ मौन पठन की विशेषताएँ
८.२.२.२ मौन पठन में ध्यान रखने की बातें
८.२.२.३ मौन पठन के लाभ
८.२.२.४ मौन पठन के प्रकार
८.२.२.४.१ गहन पठन
८.२.२.४.२ द्रुत पठन
८.३ पठन कौशल के अंग
८.४ पठन के उद्देश्य
८.५ पठन दोष
८.५.१ पठन के यांत्रिक पक्ष से संबंधित दोष
८.५.२ पठन के मानसिक पक्ष से संबंधित दोष
८.६ पठन दोष दूर करने के उपाय
८.७ पठन शिक्षण की विधियाँ
अध्याय ९ : लेखन कौशल..................................................१६३
९.१ प्रस्तावना
९.२ लेखन का महत्त्व
९.३ लेखन कौशल के अंग/पक्ष
९.३.१ यांत्रिक अंग
९.३.२ बौद्धिक अंग
९.४ लेखन के प्रकार
९.५ लेखन के उद्देश्य
९.६ लिखित रचना के प्रकार एवं उनका शिक्षण
९.७ लेखन दोष
९.८ लेखन दोष दूर करने के उपाय
९.९ लेखन कौशल विकास के उपाय
अध्याय १० : शिक्षा के सूत्र, शिक्षण प्रणालियाँ एवं युक्तियाँ................१८५
१०.१ प्रस्तावना
१०.२ शिक्षा के सूत्र
१०.३ शिक्षण सूत्र की परिभाषा
१०.४ शिक्षा के विभिन्न सूत्र
१०.५ हिंदी भाषा शिक्षण की प्रणालियाँ
१०.५.१ स्वाभाविक प्रणाली
१०.५.२ व्याकरण अनुवाद प्रणाली
१०.५.३ प्रत्यक्ष प्रणाली या संभाषण प्रणाली
१०.५.४ वेस्ट प्रणाली
१०.५.५ गठन या रचना प्रणाली
१०.५.६ संप्रेषण पद्धति
१०.५.७ व्याख्यान विधि
१०.६ सहयोगी शिक्षण विधियाँ
१०.६.१ युग्म विचार
१०.६.२ जिगसॉ विधि
१०.६.३ टोकरी तकनीक
१०.६.४ चर्चा विधि
१०.६.५ नाटयीकरण विधि
१०.७ शिक्षक प्रविधियाँ या शिक्षण युक्तियाँ
१०.७.१ प्रश्न प्रविधि
१०.७.२ विवरण प्रविधि
१०.७.३ वर्णन विधि
१०.७.४ स्पष्टीकरण विधि
१०.७.५ कहानी कथन प्रविधि या कथा-कथन प्रविधि
१०.७.६ उदाहरण प्रविधि
१०.७.७ गृहकार्य प्रविधि
१०.८ शिक्षा का रचनावादी दृष्टिकोण
अध्याय ११ : शैक्षिक अनुभव एवं सहायक सामग्री........................२६४
११.१ प्रस्तावना
११.२ शैक्षिक अनुभव
११.३ शैक्षिक अनुभव के प्रकार
११.४ शैक्षिक अनुभव कैसा होना चाहिए/विशेषताएँ
११.५ हिंदी शिक्षण में सहायक सामग्री
११.६ सहायक सामग्री की उपयोगिता एवं महत्त्व
११.७ सहायक सामग्री का चयन
११.८ सहायक सामग्री का प्रभावी प्रयोग में सावधानी
११.९ सहायक सामग्री का वर्गीकरण (दृश्य, श्रव्य, श्रव्य दृश्य)
११.१० भाषा शिक्षा की मुद्रित सामग्री
११.११ आधुनिक शिक्षण सामग्री
११.११.१ भाषा प्रयोगशाला
११.११.१.१ भाषा प्रयोगशाला के प्रकार
११.११.१.२ भाषा प्रयोगशाला पाठ का नमूना
११.११.१.३ भाषा प्रयोगशाला का महत्त्व
११.११.१.४ भाषा प्रयोगशाला की सीमाएँ/दोष
११.११.२ संगणक तथा इंटरनेट
११.११.२.१ भाषा शिक्षण में संगणक का महत्त्व
११.११.२.२ संगणक की सीमाएँ
अध्याय १२ : गद्य शिक्षण....................................................३०५
१२.१ प्रस्तावना
१२.२ गद्य की परिभाषा
१२.३ गद्य शिक्षण के उद्देश्य
१२.४ गद्य शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
१२.५ गद्य शिक्षण का महत्त्व
१२.६ गद्य शिक्षण की विधियाँ/प्रणालियाँ
अध्याय १३ : कविता शिक्षण................................................३१३
१३.१ प्रस्तावना
१३.२ कविता/पद्य शिक्षण के उद्देश्य
१३.३ कविता के सौंदर्य तत्व
१३.४ कविता शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
१३.५ कविता शिक्षण की प्रणालियाँ
१३.६ कविता में रुचि उत्पन्न करने के उपाय
अध्याय १४ : व्याकरण शिक्षण..............................................३२७
१४.१ प्रस्तावना
१४.२ व्याकरण की परिभाषा
१४.३ व्याकरण शिक्षण के उद्देश्य
१४.४ व्याकरण शिक्षण की प्रक्रिया/सोपान
१४.५ व्याकरण अध्यापन की प्रणालियाँ
१४.६ व्याकरण शिक्षण का महत्त्व
१४.७ व्याकरण शिक्षण को रुचिकर बनाने के उपाय
अध्याय १५ : रचना शिक्षण..................................................३४०
१५.१ प्रस्तावना
१५.२ रचना के प्रकार
१५.२.१ मौखिक रचना
१५.२.१.१ मौखिक रचना शिक्षण के उद्देश्य
१५.२.१.२ मौखिक रचना के प्रकार
१५.२.१.३ मौखिक रचना शिक्षण का महत्त्व
१५.२.२ लिखित रचना
१५.२.२.१ लिखित रचना शिक्षण के उद्देश्य
१५.२.२.२ लिखित रचना के प्रकार
१५.२.२.३ लिखित रचना शिक्षण की प्रणालियाँ
१५.३ रचना संबंधी सामान्य अशुद्धियाँ
१५.४ रचना संबंधी अशुद्धियों के कारण
१५.५ लिखित रचना का मूल्यांकन तथा संशोधन
१५.५.१ लिखित रचना के मूल्यांकन में ध्यान देने योग्य बातें
१५.५.२ लिखित रचना के संशोधन में ध्यान देने योग्य बातें
अध्याय १६ : हिंदी भाषा शिक्षण एवं मूल्यांकन..............................३६८
१६.१ प्रस्तावना
१६.२ मूल्यांकन के उद्देश्य
१६.३ मूल्यांकन की विशेषताएँ
१६.४ मूल्यांकन की आवश्यकता एवं महत्त्व
१६.५ मूल्यांकन के प्रकार
१६.५.१ संरचनात्मक तथा योगात्मक मूल्यांकन में अंतर
१६.६ सतत और व्यापक मूल्यांकन
१६.७ सतत और व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य
१६.८ सतत और व्यापक मूल्यांकन की विशेषताएँ
१६.९ सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के लाभ
१६.१० मूल्यांकन की प्रमुख विधियाँ व प्रकार
१६.११ लिखित परीक्षा
१६.११.१ निबंधात्मक परीक्षा
१६.११.१.१ निबंधात्मक परीक्षा के गुण हिंदी भाषा शिक्षण
१६.११.१.२ निबंधात्मक परीक्षा के दोष
१६.११.२ लघुत्तरी परीक्षा
१६.११.२.१ लघुत्तरी परीक्षा के गुण
१६.११.२.२ लघुत्तरी परीक्षा के दोष
१६.११.३ वस्तुनिष्ठ परीक्षा
१६.११.३.१ वस्तुनिष्ठ परीक्षा के प्रकार
१६.११.३.२ वस्तुनिष्ठ परीक्षा के गुण
१६.११.३.३ वस्तुनिष्ठ परीक्षा के दोष
१६.१२ मौखिक परीक्षा
१६.१२.१ मौखिक परीक्षा के गुण
१६.१२.२ मौखिक परीक्षा के दोष
१६.१३ प्रायोगिक परीक्षा
१६.१४ हिंदी का प्रश्न पत्र (इकाई जाँच परीक्षा) निर्माण
१६.१५ खुली पुस्तक परीक्षा
१६.१६ खुली पुस्तक परीक्षा के प्रकार
१६.१७ खुली पुस्तक परीक्षा के गुण
१६.१८ खुली पुस्तक परीक्षा के दोष
अध्याय १७ : निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण................४०८
१७.१ प्रस्तावना
१७.२ निदानात्मक परीक्षण का अर्थ एवं परिभाषा
१७.३ निदानात्मक परीक्षण के उद्देश्य
१७.४ शैक्षणिक निदान के क्षेत्र
१७.५ शैक्षणिक निदान की विधियाँ
१७.६ निदानात्मक परीक्षण का महत्त्व
१७.७ उपचारात्मक शिक्षण
१७.८ उपचारात्मक शिक्षण के उद्देश्य
१७.९ उपचारात्मक शिक्षण की विधियाँ
१७.१० उपचारात्मक शिक्षण का महत्त्व
१७.११ शैक्षिक निदान एवं उपचारात्मक शिक्षण के सोपान
अध्याय १८ : विषय संरचना.................................................४२०
१८.१ प्रस्तावना
१८.२ विषय संरचना-अर्थ एवं परिभाषा
१८.३ संरचना की विशेषताएँ
१८.४ विषय संरचना के प्रकार
१८.५ विषय संरचना के लाभ
१८.६ हिंदी भाषा की संरचना
अध्याय १९ : आशययुक्त अध्यापन कार्यप्रणाली (पद्धति)..................४५०
१९.१ प्रस्तावना
१९.२ आशययुक्त अध्यापन पद्धति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
१९.३ आशययुक्त अध्यापन पद्धति की संकल्पना और स्वरूप
१९.४ आशययुक्त अध्यापन पद्धति की मान्यताएँ
१९.५ आशययुक्त अध्यापन पद्धति के उद्देश्य
१९.६ आशययुक्त अध्यापन पद्धति की रचना/सोपान
१९.७ आशययुक्त अध्यापन पद्धति का महत्त्व
१९.८ आशय या पाठ्यवस्तु का विश्लेषण
१९.९ आशय विश्लेषण के अंग या घटक
१९.१० आशय विश्लेषण का महत्त्व
अध्याय २० : पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम.....................................४६७
२०.१ प्रस्तावना
२०.२ पाठ्यचर्या-अर्थ एवं परिभाषा
२०.३ पाठ्यचर्या की उपयोगिता और महत्त्व
२०.४ पाठ्यचर्या निर्माण के तत्व
२०.५ पाठ्यचर्या के केंद्रिक या मूलभूत घटक
२०.६ पाठ्यक्रम : अर्थ एवं स्वरूप
२०.७ पाठ्यक्रम की आवश्यकता एवं महत्त्व
२०.८ पाठ्यक्रम निर्माण के मूलभूत सिद्धांत या तत्व
२०.९ पाठ्यचर्या एवं पाठ्यक्रम में अंतर
२०.१० पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक में सहसंबंध हिंदी भाषा शिक्षण
अध्याय २१ : पाठ्य-पुस्तक................................................४८२
२१.१ प्रस्तावना
२१.२ पाठ्य-पुस्तक का अर्थ एवं परिभाषा
२१.३ हिंदी पाठ्य-पुस्तकों के प्रकार
२१.४ पाठ्य-पुस्तक की आवश्यकता एवं महत्त्व
२१.५ हिंदी पाठ्य-पुस्तक की विशेषताएँ/गुण
२१.५.१ आंतरिक विशेषताएँ
२१.५.२ बाह्य विशेषताएँ
अध्याय २२ : हिंदी अध्यापक................................................४९७
२२.१ प्रस्तावना
२२.२ हिंदी अध्यापक की योग्यता
२२.३ हिंदी अध्यापक के गुण
२२.३.१ हिंदी अध्यापक के सामान्य गुण
२२.३.२ हिंदी अध्यापक के विशिष्ट गुण
२२.४ हिंदी अध्यापक का व्यवसायिक विकास
२२.५ हिंदी शिक्षक संगठन
२२.६ शिक्षक संगठन के उद्देश्य
२२.७ शिक्षक संगठन के प्रकार
२२.८ शिक्षक संगठन का योगदान
संदर्भ सूची...................................................................५१३